Skip to main content

Posts

सिलसिला!

सिलसिला जिस से गुफ्तुगू तक न पहुँचा, उसके संग चाँद तक जाना चाहते हैं हम! शौक़ ज़रा मुख्तलिफ रखते हैं ज़माने से, सहरा के सुराब से सेराब होना चाहते हैं हम!

لفظوں کا کھیل

ہر   شئ    زمانہ    کی   فناء   ہوتی   ہے،  ہر بات   کہاں   لب    سے   بیاں  ہوتی  ہے!  صاحبِ  دل  ہو تو  جانتے   ہوگے   یہ  بھی،  بات   دل کی   کب  لفظوں   میں   بیاں   ہوتی  ہے!  بقول  اسے   محسوس  کیا  جا  سکتا ہے،  مگر  یہ  حقیقت  بھی   حسّاسوں  پر  عیاں  ہوتی ہے!  جانے  والے  لوٹ  ہی آتے  ہیں  ایک  وقت  کے  بعد،  مگر   کب  لوٹتے  ہیں  وہ  جن سے  زندگی   خفا  ہوتی  ہے!  عاس !  لفظوں  کا  کھیل   چلے  گا  کب  تک؟  بکھرے  ہوئے  ہر-۲ لفظ  کی  ایک  زباں  ہوتی  ہے!

लफ्ज़ों का खेल!

हर शय ज़माने की फना होती है, हर बात कहाँ लब से बयां होती है! साहिब-ऐ-दिल हो तो जानते होगे ये भी, दिल की तकलीफ कब लफ्ज़ों में बयां होती है! कहते हैं उसे महसूस किया जा सकता है, मगर ये हक़ीक़त भी हस्सासों पर अयां होती है! जाने वाले लोट ही आते हैं एक वक़्त के बाद, मगर कब लोटते हैं वो जिनसे ज़िन्दगी ख़फा होती है! आस ये लफ्ज़ों का खेल चलेगा कब तलक, बिखरे हुये हर-२ लफ्ज़ की एक ज़ुबां होती है!

تم نہ سمجھ سکو شاید!

بڑا   نازک   سا  رشتہ  ہے ،  تم  نہ  سمجھ  سکو  شاید!  وہ شخص؛  لگتا  مجھے  فرشتہ  ہے تم نہ  سمجھ سکو  شاید!  بڑا   معصوم   دکھتا   ہے  بڑی  شوخی  جھلکتی  ہے،  اگر   وہ ساتھ میں  ہو تو  ہر   شئ   اچھی   لگتی  ہے۔ وہ   میرے   سامنے ہوکر   بھی   کوسوں   دور  ہوتا  ہے،  اینسا   کینسے   ہوتا  ہے؛  تم   نہ  سمجھ  سکو   شاید!  میخانے   ہزاروں ہیں  ہزاروں  انمیں  ساقی  ہیں،  ہمیں  سیراب   کرنے  کو  صرف  انکی  آنکھیں  کا فی  ہیں۔ یہ  دیوانہ   ہے  کہنے  دو   اپنے  شہر  میں   رہنے  دو،  طبیبوں  کا  یہ  نسخہ...

तुम ना समझ सको शायद!

बड़ा नाज़ुक सा रिश्ता है, तुम ना समझ सको शायद! वो शख्स! लगता मुझे फरिश्ता है, तुम ना समझ सको शायद! बड़ा मासूम दिखता है बड़ी शोखी झलकती है, अगर वो साथ में हो तो हर शय अच्छी लगती है! वो मेरे सामने होकर भी कोसों दूर होता है, ऐंसा कैंसे होता है? तुम न समझ सको शायद! मेखाने हज़ारों हैं हज़ारों उनमें साक़ी हैं, हमें सेराब करने को सिर्फ उनकी आँखें काफी हैं! ये दीवाना है कहने दो अपने शहर में रहने दो, तबीबों का ये नुस्खा है तुम ना समझ सको शायद! बड़ा नाज़ुक सा रिश्ता है, तुम ना समझ सको शायद! वो शख्स! लगता मुझे फरिश्ता है, तुम ना समझ सको शायद!

हाल-ऐ-दिल !

हाल-ऐ-दिल सुनाते रहो अच्छा लगता है, दिल की बातों से तो ये बच्चा लगता है, ज़ुबां तो झूठ भी बोलती है यक़ीनन, मगर दिल का हर लफ्ज़ सच्चा लगता है!

रूसवाई!

दूर हमसे ज़माने की बुराई हो गई, जुर्म ऐंसा किया कि रूसवा सारी खुदाई हो गई! वक़्त के अहाते में पनाह-गिज़ीन थे हम, खुद से बाहर जो निकले तो रूसवाई हो गई। دور     ہم    سے   زمانے    کی    برائ   ہوگئ،  جرم    اینسا   کیا   کہ   رسواء   ساری   خدائ    ہوگئ،  وقت   کے   احاطہ   میں   پناہ   گزیں   تھے   ہم،  خود    سے   باہر   جو    نکلے   تو   رسوائ   ہو  گئ۔۔۔