किसी ने कहा! संस्कार ही अपराध रोक सकते हैं, सरकार नहीं!
मेरा मानना यह है कि;
संस्कार और सरकार एक सिक्के के दो पहलू हैं...
जहाँ संस्कार हों वहाँ सरकार की ज़रूरत नहीं!
जहाँ संस्कार न हों वहाँ सरकार की ज़रूरत पड़ती है!
किसी एक जगह पर उपस्थित भीड़ के सभी लोग संस्कारी नहीं होते, असंस्कारी सिर्फ इसलिये अपराध नहीं कर पाते...
क्यूँकि वो डरते हैं... कानून से, पुलिस से, लोग क्या कहेंगे, किसी ने देख लिया तो आदि से।
