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जाते जाते एक बात बताते जाओ...

जाते जाते एक बात बताते जाओ... अब तक हर शख्स को आज़माया तुम ने!  क्या कोई अपने जैंसा भी पाया तुम ने?

महसूस कर सको तो!

महसूस कर सको तो आओ करायें तमको, वर्ना जाने भी दो अब क्या बतायें तुमको!

उल्फत-ऐ-खुदा!

उल्फत-ऐ-खुदा में 'आस' बड़ा मुख्तलिफ सा हाल था, खुश था वो जो चला गया; जो ठहर गया उसे मलाल था!

मुख्तसर!

कहाँ वक़्त है अब दास्तानें सुनने का, तुम अपनी बातों को मुख्तसर कहा करो!

دیکھو نہ دور تم حاضر یہ دور ہے!

دیکھو نہ دور تم حاضر یہ دور ہے،  انصاف اب جہاں میں زندہ درکور ہے!  مظلوم کی آہ پر خاموش ہیں سبھی،  ظالم کی ہمایت میں زوروں کا شور ہے!  وقت کی نزاقت ہے؛ لمحئہِ فکر ہے،  رہبر یہ کہ رہے ہیں؛ یہ صبر کا دور ہے!  قدرت کو للکارتی یہ انسانی کاوشیں،  اب دین پر جمنے اور جمانے کا دور ہے!  جاہل جب لے رہے ہیں اماموں کا امتحان،  فتنوں سے اب خود کو بچانے کا دور ہے!  دشمن کے رفیق بن گئے ہیں صاحبِ مال لوگ،  یہ غریبوں کی آبرو بچانے کا دور ہے!  زندہ دلی کا ثبوت مانگتی ہے قوم اب،  دھڑکنِ قلب اب؛ محسوس کرانے کا دور ہے!

दोखो न दूर तुम हाज़िर ये दौर है!

दोखो न दूर तुम हाज़िर ये दौर है, इन्साफ अब जहाँ में ज़िन्दा दरकोर है! मज़लूम की आह पर खामोश हैं सभी, ज़ालिम की हिमायत में ज़ोरों का शोर है! वक़्त की नज़ाक़त है; लम्हा-ऐ-फिक्र है, रहबर ये कह रहे हैं; ये सब्र का दौर है! कुदरत को ललकारती ये इनसानी काविशें, अब दीन पर जमने और जमाने का दौर है! जाहिल जब ले रहे हैं इमामों के इम्तिहान, फितनों से अब खुद को बचाने का दौर है! दुश्मन के रफीक़ बन गये हैं साहिब-ऐ-माल लोग, ये गरीबों की आबरू बचाने का दौर है! ज़िन्दादिली का सबूत मांगती है क़ौम अब, धड़कन-ऐ-क़ल्ब अब; महसूस कराने का दौर है!

तू मेरे गाँव में मशहूर बहुत है!

मेरे गाँव मे तु मशहूर बहुत है, तेरा शहर मगर दूर बहुत है! खोलकर नादानियों की किताब बैठा हूँ में, उसमें किस्सा हमारा मशहूर बहुत है! यादें हमारी संभालकर रखना ज़रा, यहाँ भूल जाने का दसतूर बहुत है! जानता हूँ मुलाक़ात भी मुमकिन नहीं अब, मगर उम्मीद बनाये रखने में सुकून बहुत है! सुबह में खिलते गुलाब की तरह हो तुम, जानां गुलाब हमारे यहाँ मशहूर बहुत है!