मुझे मालूम है!
उजालों में भी अंधेरे ढ़ूडता है!वो कमज़र्फ सिर्फ बहाने ढ़ूडता है ।
करने को तो सिर्फ बातें शौक हैं उसका,
और इस शौक में भी सिर्फ फसाने ढ़ूडता है।
हमारे दर्द को वो अपना दर्द कहता है!
और इस झूठ को वो सरेआम बोलता है।
मुझे मालूम है वो कोई काम कर नहीं सकता,
मगर अपने आपको वो माहिर-ऐ-ज़माना बोलता है।
| मुझे मालूम है! |