सुना है! हवा में उड़ने का शोक़ बहुत है,
ज़मीन से फासला भी ख्याल रखना!
अगर उड़ गये तो क्या करोगे?
और जो गिर गये तो क्या करोगे?
तेरे महल की रोनक़े देखकर,
लगी ली आग हमने; अपनी झोंपड़ी में।
अब जो हाल पूँछो तो क्या करेंगे?
और भूल जाओ तो क्या करेंगे?
तेरे हुस्न की दीद पा कर,
लुटा दिया है हमने जो खुद को।
अब हाँ कहोगे तो क्या करेंगे?
ओर न करोगे तो क्या करेंगे?
हस्रतों की हद भी देखो,
और चाहतों का शुमार भी।
जो पा लिया तो क्या करोगे?
जो न पा सके तो क्या करोगे?
रहबर-ऐ-क़ाफला तुम हो,
भरोसा सब का बहाल रखना!
जो लुट गये तो तुम क्या करोगे?
अगर लुटा दिया तो हम क्या करेंगे?
जो ओढ़ रखी है; चादर तुमने,
मुख़लिसी का ख्याल रखना!
जो गिर गई तो क्या करोगे?
अगर गिरा दिया तो क्या करोगे?
आईने में दिख रहा है; हुस्न चेहरे का ज़रूर,
बातिन का भी ज़रा ख्याल रखना!
जो खुद दिख गया तो क्या करोगे?
किसी ने देख लिया तो क्या करोगे?
जो कह रहे हो ज़ुबान से तुम,
दिमाग को भी शामिल-ऐ-हाल रखना!
जो कुछ कह गये हो; ख्याल रखना?
जो सुन लिया तो क्या करोगे?